यदि भगवान का नाम लेते हुये भी यदि मन में ” कुविचार ” आते हैं , तो कारण जाने !

भगवान की पहचान, ईश्वर क्या और भगवान कौन ?

हम बचपन से ही भगवान और देव-देवियों की प्रार्थना करते आ रहे हैं, उनकी भक्ति करते आ रहे हैं और इसी तरह अलग-अलग तरीके से भगवान एवं धर्म से जुड़े हुए हैं. फिर भी, हम पूछते हैं कि भगवान कौन हैं? क्या हकीकत में भगवान का अस्तित्व हैं? क्या वास्तव मे भगवान हैं?

कहाँ हैं भगवान? क्या किसी ने भगवान को देखा हैं या उनका अनुभव किया हैं? भगवान का पता क्या हैं? ऐसे कई प्रश्न दिमाग में उठते रहते हैं.दरअसल ईश्वर और भगवान, शब्द-कोष में देखने जायेंगे तो एक ही अर्थ मिलेगा और व्याकरण के जगत में तो दोनों पर्यायवाची कहलाते हैं.

परन्तु अध्यात्म इनके मूलभूत भेद को स्पष्ट करता है जो हमारी किसी भी धार्मिक मान्यता के आधार स्तम्भ को हिलाये बिना हमारी संकुचित दृष्टि का विकास और विस्तार करता है. इन शब्दों के रहस्य को समझे बिना आज धर्म-जगत में एक संप्रदाय दुसरे संप्रदाय के विरोध में खड़ा दिखता है.

खैर आज हम आपके लिए एक ऐसा वीडियो लेकर आये हैं जिसमे हम आपको बतायेंगे कुछ ऐसी बातें जिन्हें जाकर आप हैरान हो जाओगे. इस वीडियो में हम आपको बताने जा रहे हैं की अगर भगवान का नाम लेते हुये भी यदि मन में ” कुविचार “ आते हैं, तो क्या हैं उसके कारण ?

देखें निच्चे दी गई वीडियो. अगर किसी कारण वीडियो ना चले तो वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें !

लेकिन जब ईश्वर स्वयं ‘एक’ ही है तो ईश्वर को समझने में इतनी विविधता, विचित्रता और विरोधी भाव कहाँ से उठ रहे हैं ? कारण है अनुभव-हीनता, कारण है अहंकार की दृढ़ता. ज़रा इन पर्दों को हटाकर देखें तो इन दिव्य शब्दों में समाया वह व्यापक-अनंत-शाश्वत स्वरुप स्वयं ही उघड़ कर बाहर आएगा.

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